उधार लिया था
कुछ उधार लिया था एक अनजान से,
अब वही ख्याल रखता है मेरा जान से !
रिश्तों की समझ आते आते बहुत वक़्त गुज़र जाता है,
अपनों का परायापन और परायों का अपनापन समझ से बहार हो जाता है !
दिल भरा भरा और जेबें अक्सर ख़ाली रहतीं हैं!
यादें बहुत आती हैं और आँखें आँसू संभाले रहतीं हैं
पैसे रहते तो भी खर्च नहीं कर पाते हैं
अक्सर बूढ़े माँ बाप बच्चों की राह देखते देखते कहीं चले जाते हैं !
आदत भी ख़राब कर रखी है मैंने उनको मानाने की
उनकी भी आदत रही है बिना बताये चले जाने की
कोशिश की, एक दिन सब बोल दूँ
पर बुरा न लग जाये ये सोच कर तस्वीर के सामने से चला आया !
जाने कब वक़्त थम जाये या साँसे
अब बस मिल कर कह दूंगा सारी बातें !!
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