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Showing posts from January, 2026

आंसू नहीं जानते हैं !!

गालों पर फैलते काजल की कीमत  आंसू नहीं जानते हैं !! लहरों से डरने वाले समंदर नहीं लांघते हैं !! काग़ज़ के शेर अक्सर बारिशों में बाहर नहीं आते हैं  वक़्त पड़ने पर खून के रिश्ते जम जाते हैं  किताबों की पढ़ी बातें बस परीक्षा में लिख कर आते हैं  और असल ज़िन्दगी में जीने के फ़लसफ़े बदल जाते हैं  कोशिश करने से हार बुरी नहीं लगती  जो जीत जाते हैं वो ये बात समझाते हैं  जिनको आँखें मूँद कर देख लिए करते थे  अब वो आँख खोल कर भी नज़र नहीं आते हैं  बात तेरे मेरे की कभी थी ही नहीं  बस कुछ लोग बिना बोले लकीर खींच जाते हैं  उड़ तो लूँ पर आसमाँ छोटा पड़ने लगा है  बादलों में घर बनाया था   पर हवाओं ने सब इधर उधर कर दीया है  कोई चुटकी काट कर बता दो यारों  दिल पर किसने कब्ज़ा कर लिया है  छीन कर लाये थे उनको गैरों से  अब गैरों ने ही हमें चलता कर दीया है  कोई रोक लो पानी को, ज़मीन प्यासी है  सूरज ने भी बादलों पर पहरा कर दीया है  अरे आते जाते लोग ताना मारने लगे थे  हमने भी किसी किसी के लिए खुद को बहरा कर दीया है...

कांधा झुका नहीं है मेरा!

कांधा झुका नहीं है मेरा, बस वो दोस्त, अब दोस्त नहीं रहा मेरा।  कोशिश हजार की मनाने की, पर उसने थान रखी थी चले जाने की।  अच्छा हुआ उसने मुड़ कर नहीं देखा मैं आंसुओं को रोक नहीं पाता।   चल कर इतनी दूर आए थे भला ये भी कोई उम्र हुई छोड़ जाने की।   दरवाजा मैंने निकाल रख छोड़ा है, अब जरूरत नहीं पड़ेगी खटखटाने की।  खंजर अब नहीं बचे हैं घर में मेरे, तुम्हें जरूरत नहीं है घबराने के।  आईना भी तोड़ रखा है, क्या ही पड़ी है अब इतराने की।  आहिस्ता बोल कर समझाना बेमानी था, क्या ज़रूरत थी चीख कर निकल जाने की।  पड़ोसी अब अक्सर पूछ लेते हैं कि क्यों आवाजें कम आती है हमारे घर से।   मैं मुस्कुराता हूँ ये बोलकर, ज़रूरत नहीं पड़ती अब खुद को मनाने की 🙂

उधार लिया था

 कुछ उधार लिया था एक अनजान से,  अब वही ख्याल रखता है मेरा जान से ! रिश्तों की समझ आते आते बहुत वक़्त गुज़र जाता है,  अपनों का परायापन और परायों का अपनापन समझ से बहार हो जाता है ! दिल भरा भरा और जेबें अक्सर ख़ाली रहतीं हैं! यादें बहुत आती हैं और आँखें आँसू संभाले रहतीं हैं  पैसे रहते तो भी खर्च नहीं कर पाते हैं  अक्सर बूढ़े माँ बाप बच्चों की राह देखते देखते कहीं चले जाते हैं ! आदत भी ख़राब कर रखी है मैंने उनको मानाने की  उनकी भी आदत रही है बिना बताये चले जाने की  कोशिश की, एक दिन सब बोल दूँ  पर बुरा न लग जाये ये सोच कर तस्वीर के सामने से चला आया ! जाने कब वक़्त थम जाये या साँसे  अब बस मिल कर कह दूंगा सारी बातें !!