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कोई अपना अधूरा सपना छोड़ गया है, 

मैं मुंबई सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफोर्म 3 पर बैठा अँधेरी लोकल का इंतज़ार कर रहा हूँ। 

कोई अपना अधूरा सपना छोड़ गया है, 2 चप्पल उनमें से एक टूटी हुई, और एक डोरी से बंधी हुई है. 

एक चश्मा प्लास्टिक टेप से जिसका सिरा चिपकाया हुआ है। एक थैला जिसमें से कुछ काग़ज़ बाहेर झाँक रहे हैं, वो गवाही दे रहे हों मानो की सपना मरा नहीं है, बस अधूरा है।कुछ दवाई के पत्ते पड़े हैं शायद दमा या खांसी के रहे होंगे। एक पुरानी अटैची, जिसको खोल कर एक पुलिस वाला कुछ ढूंढ रहा है और दूसरा पुलिस वाला फ़ोन पर जाने किस्से बात कर रहा है, कुछ किताबें भी पड़ी दिख रहीं हैं। "आज का खलनायक और नायक कौन" शीर्षक है, और थोड़ी दूर एक खाने का डब्बा बिखरा हुआ है, 3 सूखी रोटी 2 प्याज और थोड़ा सा आम का अचार जो बिखर गया था। माँ या बहन ने बना कर दिया होगा। क्यूंकि सपना देखना कोई अपराध थोड़े न है। एक माँ जानती है की बेटे का सपना सच होता है, और एक बहन भी मानती है की एक भाई का सपना पूरा होता है।  

और थोड़ी ही दूर एक गहरी नीली पैंट और सिंपल सफ़ेद चेक में एक लड़का ट्रैक पर सो रहा था , शायद वो ही अपना सपना अधूरा छोड़ गया था। 

अँधेरी लोकल अब प्लेटफार्म नम्बर 1 से जाएगी।

Comments

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  2. बहुत ही बेहतरीन और दिल को छू लेने वाली लेखनी है आपकी 👍

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    1. धन्यवाद, आपने समय निकाल कर पढ़ा !

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  3. हे ईश्वर कितना मर्मांतक दृश्य है ये......
    आपकी सशक्त लेखनी और ये मंज़र कशी,,, लगता है कि मैं भी आपके साथ प्लेटफार्म नंबर 3 पर खड़ा हुआ हताशा के साथ अपनी हथेली पर विवशता की मुट्ठी बांधकर प्रहार करते हुए कुछ बुदबुदा रहा हूं..... दुआ करता हूं कि किसी के ख़्वाब ना टूटें...

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    1. आपकी विनम्रता को प्रणाम, आपके स्नेह के लिए ह्रदय से धन्यवाद। और आपके शब्दों से बल प्राप्त हुआ। पुनः प्रयास करूँगा एक और रचना लिख पाने की।

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  4. I am not so much in to poems but whatever you wrote I love reading bless you.

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  5. दिल छू लिया इस कविता ने

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