रेड लाइट

जैसे ही ड्राइवर ने इग्निशन के गले में चाभी डाल कर जो घुमाई, हमें फैजुद्दिन चचा की याद आ गई, बस यूँ कहिये की आँख बंद कर लीजिये और उन्हें हाज़िर खड़ा पाइये। चाभी वो ऐसे घुमा रहा था जैसे फैजुद्दिन चचा खाँस रहे हों और चाची मुँह दबा रहीं हों की बहु जाग न जाए।  कम से कम ७ या ८ बारी गला दबाने यानि की चाभी घुमाने के बाद जो झमझमा के बस चालू हुई तो एक बार को लगा कि खड़ा हो कर सिटी ही बजा दूँ,  फिर ज़हन में ख़याल आया की मेरठ नहीं मुंबई है।  

तो साहब मुंबई से नाशिक का सफर चालू हो गया। पहले १५ मिनट तो ऐसे गुज़र गए के पता ही नहीं चला। फिर आ गई लालमुँहि  रेड लाइट। अब रेड लाइट आते ही अपने लल्लन की आँखों में चमक आ गई, किस्सा थोड़ा पुराना है पर बता ही देते हैं, आप कहाँ भागे जा रहे हैं, परसो की ही बात ले ली जिए, लल्लन के मुँहबोले चच्या ससुर की मौसी के पोते के मामा की बहिन के देवर के एकलौते सपूत जो अभी अभी कक्षा ३ में आएं हैं पूछ बैठे, फूफाजी ये रेड लाइट एरिया क्या होता है। अब रेड लाइट एरिया सुनते ही समझदार लोगों के कानों में घंटियां  बजने लगती हैं, और भोली जनता को केवल लाल बत्ती ही दिखलाई पड़ती है। अब आपको क्या दिखा ये आप जानिए। तो फूफाजी के मुँह से फूँक तक नहीं निकल पा रही थी क्यूंकि फूफाजी दो बार रेड लाइट एरिया में जा चुके हैं और रेड लाइट देखते ही उन्हें नरगिस नज़र आती थी, जो इन्हें प्यार से लल्लू बुलाया करती है। 

कलमुँहे अंग्रेज़ भी न ये रेड लाइट का कॉन्सेप्ट बना कर लल्लन जैसे को फंसा गए। कोई और नाम दे दिया होता या इसको या उसको दोनों ही रेड लाइट। अब फूफी बोल उठी बेटा तेरे फूफा जी को रेड लाइट जम्प करने का शौक़ है, अक्सर बोलते हैं, रेड लाइट एरिया में पकड़ा गया हूँ थोड़ी देर हो जाएगी घर आने में। 

अब फूफी को भी कौन समझाए की नर्गिस का प्यार फ्री मैं मिलता नहीं। नाड़े के साथ पैसे भी ढीले करने पड़ते हैं।अब आप ज़रा सुस्ता लीजिये अपनी बस अभी मुंबई से बहार ही आई है, मैं भी कहीं ढाबे पर रुक चाय पी लेता हूँ  किन्तु मेरे दोस्त कहानी अभी बाकी है। अमाँ मियाँ मुँह और मूड दोनों ख़राब हो गए।आप ही बताइये की ये हाईवे के ढाबे वाले चाय बकरी के दूध की बनाते हैं क्या, मुह का सारा स्वाद तेल वाली मठरी और से खट्टे सहतूत सा हो गया है। जाने दीजिये आप आगे सुनिए, हाँ तो फैजुद्दिन चचा का गला इस बार एक ही बार दबा और भिनभिनाती हुई गाड़ी स्टार्ट हो गई। अब गाड़ी भी हवा से बाते कर रही है, अगर मैं गलत न हूँ तो अभी अभी एक साइकिल रिक्शे वाला चार सवारी को बैठा कर क्रॉस कर गया है। २० की स्पीड बोलूं तो अतिशियोक्ति नही होगी। 

ड्राइवर की भी उम्र दरगाह मैं बैठ कर अच्छे दिन याद करने वाली सी ही रह गई है। पर ना जाने क्या मजबूरी होगी जो एक साथ ५२ इंसानो की ज़िन्दगी के साथ खिलवाड़ कर रहा है। कंडक्टर को अगर नज़र भर देख लो तो ये लगता की जैसे अगले ही मोड़ पर बस से कूदने वाला है, ना जाने क्यों वो एक बार भी सीट पर नहीं बैठा और ना ही दरवाजा बंद किया उसने। 

खैर मैंने भगवान और अल्लाह दोनों को अपने बूढ़े पड़ोसिओं का वास्ता दे दिया है । अब जैसा ख़ुदा चाहे हम रहेंगे तो मीर अफज़ल साहब भी रहेंगे और हम ही न रहे तो फिर सोचना क्या।  अरे भाई मीर साहब बहुत नेक इंसान है सारी ज़िन्दगी लोगों  की मदद की है और पांच वक्ति नमाज़ी भी हैं। अब हमारे दद्दू के लंगोटिये समझ लो। एक टपका तो दूसरे का जाना तय है इसलिए दोनों गॉड को लोग बोल दिया है। अब आप लोगों की जिज्ञासा खत्म हो गई हो तो कसारा घाट के आगे चलें। 

गोया फूफी की बात चल रही थी नाकि नरगिस की। ओह एक बात बताइए, कहीं आप भी कभी किसी रेड लाइट एरिया में, यानि की  मेरा मतलब वो क़तई नहीं है जो आप समझ रहें हैं, चलिए रेहने दीजिये ज़ाती प्रश्न न ही पूछे जाएँ तो अच्छा है, पर एक बात तो पक्की है आपकी भी कोई न कोई नरगिस तो होगी, है ना....? मुस्कुरा कर आपने जता ही दिया। तो जनाब फूफी का ये बोलना रहा और सेठ अमीर चंद को खांसी आ गई और सेठ अमीर चंद वही हैं जो लल्लन की माँजी को ३६ साल पहले बियाह कर लाए थे। अब फूफी को थोड़े न पता था की किस लाइट के बारे में मनोज पूछ रहा है। अब बैठक में सब ऐसे तीतर बितर हो गए जैसे कोई खुला सांड घुस आया हो। लल्लन को भी मौका मिल गया और फूफी को छत का इशारा करते हुए ऊपर की भाग लिए, फूफी भी घूंघट दांतों में दबाये अपने गदराय हुए डील डॉल को लिए फूफा के पीछे होली। यहाँ लल्लन की नींद खुल गई और लल्लन पूना पहुंच गए क्यूंकि लाल गाड़ी पुना जा रही थी और हरी गाड़ी नाशिक। अब पूना से नाशिक की बस कल सुबह की है और लल्लन कोई रेड लाइट एरिया में होटल ढूंढेंगे। 

आप अपना ख़याल रखिये। 


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