मदर सा

सुशेंद्र कुमार चट्टोपाध्याय आजीवन अमरीका में रहे। अब उम्र का दौर बाकी सब दौरों को पीछे छोड़ गया था, और बच्चे अपनी अपनी ज़िन्दगी में बिज़ी हो गए थे तो उनका मन मानुष माटी के लिए पीड़ित हो गया और चले आये वापस अपने देश। अब जब आ ही गए थे पुश्तैनी मकान में जहाँ कभी इन्हीं तंग गलियों में घोडा गाड़ी चला करती थी अब सरपट ई-रिक्शा चलते हैं, गलियां वही पुरानी थी जान पहचान वाले इक्का दुक्का कोई बचा होगा। तो घूम घूम कर गलियां देख रहे थे। 

आज जाने क्यों चटो जी सवेरे से ही खुश दिखलाई पड़ रहे थे मानो अभी-अभी कॉलेज पास किए हों। शायद आज़ादी का एहसास हुआ होगा, शायद क्या हुआ ही होगा। अब मतलब ना पूछिए जनाब, आपको आईडिया भी नहीं होगा कि कितनी सख़्ती है विदेशों में। अब यहाँ कितना आराम है कहीं भी हल्का हो लो, जब मन चाहा थूक लो या मन न भी करे तो भी थूकते रहो। मैं तो कहता हूँ कि थूकने का राष्ट्रीय स्तर पर खेल करवाया जाना चाहिए। थूको प्रतियोगिता। 

अनिवेज़ आगे बढ़ते हैं, नहीं तो आप लोग आगे बढ़ जाएंगे। तो चटो बाबू घूमने निकल पड़े बाज़ार की ओर, वक़्त दोपहर का रहा होगा, चटो बाबू को कुछ भूख सी लगने लगी तो उन्होंने पहली गोश्त दो प्याज़ा वाले होटल के मालिक से अपनी एन-आर-आई वाली टोन में पुछा कि "तुम कैसे हो मेरे दोस्त, तुम मुझे मदर सा खाना खिलवा दो"। 

बस फिर क्या था पुरानी दिल्ली के रॉबिन हुड अपने छब्बन मियां दुनिया के रखवाले, जो हर वक़्त सबकी मदद को तैयार रहते हैं, बिना वक़्त जाया किये चट्टोपाध्याय जी को गोद में उठाये दौड़ लिए पास ही के एक मदरसे की ओर, 

और वहीं जा कर दम लिया, जहाँ मौलवी साहब कलमा पड़ रिए थे। छब्बन ने भी चटो जी को बोलने का मौका ही नहीं दिया, सर पर नमाज़ की टोपी रखी और कलमा पढ़वा डाला। कलमा तो खुदा को याद करने के लिए था लेकिन पास ही बैठे उस्मान के अब्बा जिनके अब्बा के अब्बा के अब्बा के अब्बा ग़ियास उद-दीन बलबन के राज दरबार में आया जाया करते रहे होंगे, उन्होंने बड़े ही प्यार से सुशेंद्र कुमार चट्टोपाध्याय जी को मियाँ कैसे हो पूछ लिया, 

बस सुशेंद्र कुशेंद्र की तरह लगे रोने, अरे भाई उनको लगा की इस उम्र में खतना न करना पड जाये। पोते पोतियों की उम्र में हॉस्पिटल के चक्कर। चटो बाबू जोर जोर से रुदाली बन बैठे। बड़ी मुश्किलों के साथ उनको समझा बुझा कर मदरसे के पास वाले करीम के होटल ले आएं हैं। बस अभी वो सकते में हैं। 


Comments

Popular posts from this blog

कृष्ण मुझ से जब पूछेंगे !!

उधार लिया था

ग़लतफ़हमी