ज़िंदगी

सफ़ेद रंग थोड़े ना होता है, 

आँखों को बिना काले रंग के सुन्दर कौन कहता है, 

नीला आसमान सिर्फ़ ज़मीन से नज़र आता है,

पानी रंग और आकार कभी भी बदल पाता है,

पक्षिओं का घर घोंसला कहलाता है,

किसी के ना होने का ग़म ज़ुबान से बयाँ नहीं हो पाता है, 

और किसी के मिल जाने की ख़ुशी दिल आंसुओं से आँखों को भिगो कर बताता है,

कोई सिर्फ़ मतलब के लिए प्यार करे वो जीते जी दूसरों की नज़रों में मर जाता है,

और कोई बेवजह मदद करे तो वो फ़रिश्तों सा बन जाता है,

माँ बाप की जगह अक्सर कोई नहीं ले पाता है,

ग़लतफ़हमी हो तो भाई-भाई का दुश्मन हो जाता है,

जो वक्त पड़ने पर अपनों का साथ छोड़ दे,

उन्हें वक्त एक ना एक दिन आईना ज़रूर दिखलाता है,

और जब एक दिन चले ही जाना है फिर ना जाने क्यूँ 

इंसान इतनी दौलत और कई मकान बनाता है।

आपस में प्यार हो तो एक छोटे से आशियाने में 

इंसान ख़ुशियों का संसार बसा पाता है। 

कहने को वक़्त वक़्त होता है पर 

इंसान अपनी सोच से उसे अच्छा या बुरा बनाता है।

पेट की भूख एक रोटी से भी बुझती है, 

और पैसों की भूख के लिए सारी ज़िंदगी गँवाता है। 

ना जाने क्यूँ, जानते हुए कि इक दिन मरना है फिर भी इंसान इतना घमंड खाता है।

रहने के लिए हज़ारों एकड़ ज़मीन होती है, 

और आख़ीर में ४ लोगों और थोड़ी सी लकड़ियों से काम हो जाता है।

जब पैदा होता है तब उसे कुछ पता नहीं होता, 

और जब मरता है तो सब पता होने का भी कोई फ़र्क़ नहीं रह जाता है।


थोड़ा रुक कर अग़ल बग़ल देखिए कहीं किसी को आपके प्यार की ज़रूरत ना हो!


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