तू चल मैं आता हूँ
तू चल
मैं आता हूँ
ये तेरा वहम है
या अहम बतलाता है
आसमान क्या देखता है
चलने के लिए मिली ज़मीन को झुठलाता है
सपनों की उड़ान के लिए
हक़ीक़त को भूल जाता है
चलने वाले दूसरे के भरोसे नहीं रहते
जो साथ चलना जानते हैं
वो चलने को नहीं कहते
चल देते हैं
मुहब्बत की नुमाइश आँखों से रोज़ करने वाले
प्यार करने की नज़र खो देते हैं
फरेब की मिट्टी में झूठ बोल कर सच्चाई को दबाया जाता है
पर वक़्त की आंधी में एक दिन सच कमल बन कर सामने आ ही जाता है
तू चल, मैं आता हूँ
मैं कब का निकल चला हूँ
तुझे हूँ बस यही दिखलाता हूँ
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