शिकायत किस से करूँ

हवाओं से क्या शिकायत करूँ, उन्हें तो बस बहना आता है

दोस्तों से क्या नाराज़गी, उन्हें तो बस कहना आता है 

औरत की भी क्या मज़बूरी है, उसे बस सहना आता है 

लड़ते झगड़ते लोगों को देख सोचता हूँ, इन्हें कहाँ रहना आता है 

हवा को कभी रुके हुए देखा है ?

पहाड़ों को चलते हुए देखा है ?

नदियों को कभी उल्टी बहती देखा है ?

ज़िन्दगी से शिकायत किसको नहीं है 

हर बात का जवाब किसके पास नहीं है 

सफ़ेद बाल क्या बुढ़ापे की निशानी है ?

सिन्दूर ना लगाने से पति की उम्र कम हो जाती है ?

बच्चे दूसरों के अच्छे और अपने बुरे क्यों नज़र आते हैं 

माँ बाप ज़िन्दगी भर बच्चों को पाल लेते हैं 

तो बच्चे माँ बाप को आश्रम में क्यों छोड़ जाते हैं

कहानियां नाना नानी सुनाते हैं और

दादा दादी के हमेशा सच्ची वाली बात बताते हैं 


जब मन उड़ सकता हैं तो हम उड़ क्यों नहीं पाते हैं

सच्चे लोग कहाँ मिलते हैं 

झूठों के अम्बार मिल जाते हैं 


पत्नियाँ कहना क्यों नहीं मानती 

पति भी किसी का बॉस 

किसी का नौकर है क्यों नहीं जानती 


आठ आने होने पर भी आधा रुपया ही क्यों बनता है   

३२ पैसों में क्या आता है 

इंसान साडी ज़िन्दगी पैसे जमा करता है 

पर मरने के बाद साथ क्यों नहीं ले जाता है ?

किसी अपने के मर जाने के बाद भी 

लोग ज्यादा दिन रो क्यों नहीं पाते हैं ?

आंसुओं का सूख जाना सही है क्या 

लोग मरने के बाद कहाँ जाते हैं ?

उस तरफ से कोई देख रहा है क्या 

खून का कोई रिश्ता होता है ?

फिर दोस्त का खून भगवान एक क्यों नहीं बनाते हैं 


जाने के बाद भी लोग याद आते हैं क्या 

हमें वो देख सकते हैं 

पर वो हमें नज़र आते हैं क्या ?


शिकायत किस से करूँ !!!



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