मैं मुंबई हूँ!

जहाँ रातों को जाग कर दिन में सपने बेचे जाते हैं 

जहां कोशिश करने पर मंजिलें मिल जातीं हैं 

जब भी गिरने को हो तो एक बांह थाम लेती है 

जहां तन्हाई का दामन समंदर थामे रहता है 

और वक्त हमेशा आगे बढ़ने की सलाह देता है 

जहां रोज उठने का एक मज़ा है 

जहां खाली बैठना एक सज़ा है 

जहां प्यार की कोई कमी नहीं है

जहाँ आसमान ज़्यादा है पर ज़मीं नहीं  

जहाँ सुबह की फ़ास्ट "सी एस टी" तक 

और शाम की अँधेरी लोकल तक में दोस्त बन जाते हैं

वो बंद आँखोँ से सच और खुली आँखोँ से सपने दिखाती है 

जहां धक्के खाना, वडा पाओ सी आदत बन जाती है

जहां गाय से ज्यादा दूधवाला दूध देता है 

जहाँ टैक्सी में बैठते ही मीटर डाउन रहता है  

जिसके पास बेस्ट है वो लाल बग्गी में बैठा हो ऐसा बतलाता है 

जहाँ राज है जहाँ मनसे है जहाँ हर गली में एक सैनिक मिल जाता है 

ये दुखों से भरा सूखों से भरा है 

ये दिन में सोता, रातों को जगता शहर कहलाता है 

ये मेरा शहर, मुंबई के नाम से जाना जाता है !

मैं मुंबई हूँ!

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