कुछ बातें बोलकर समझ नहीं आतीं !!

कोना सब खा जाता है
रोना सब बहा ले जाता है
हँसना सब छुपा जाता है
कहना सबको नहीं आता है
सुन हर कोई नहीं पाता है
आँख सब देख नहीं पाती है
नज़र से कोई नहीं बच पाता है

दिल कब पिघलता है
और कब पत्थर हो जाता है
ज़ुबान कभी भी लड़खड़ा सकती है
दाँत कभी भी तोड़े जा सकते हैं
हड्डियाँ जल्दी जुड़ जाती हैं
दिल जोड़कर भी जोड़े नहीं जाते हैं

मुहब्बत बेवफ़ा ही कहलाती है
प्रेम अंधा ही रह जाता है
आत्मा छोड़ जाती है
और शरीर जल जाता है

कोई अपना धोखा दे जाता है
और एक सपना सच भी हो जाता है
लोग मिलते हैं, पर मिल नहीं पाते हैं

लोग अलग होते हैं, पर हो नहीं पाते
दिन बदलते हैं, फिर लोग भी बदल जाते हैं
किसी को छोड़ना आसान हो जाता है
जब वो पलटकर जवाब दे जाता है

बातें ख़त्म नहीं होतीं
जब दोस्ती गहरी होती है
काम बुरा नहीं लगता
जब पसंद का होता है

कुछ बातें बोलकर समझ नहीं आतीं
और कुछ बातें पढ़कर समझ आ जाती हैं


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