नोट बंदी
ये उस दिन के बाद की बात है जब रात ८ बजे के बाद भारत देश, लगभग सारा देश सो नहीं पाया था। ५०० और १००० रुपय के नोटों का चलन उस दिन की मध्य रात्रि से बंद होना था। अगले दिन से सारा देश एक साथ बहार आ कर खड़ा हो गया था। सभी धर्मों के लोग सभी जातीयों के लोग सभी वर्णो के लोग सब एक साथ एक के पीछे एक शांति से बैंकों की लाइनों में साथ आ गए थे। वहीं किसी एक लाइन में मैं भी खड़ा था और देख पा रहा था की किसी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा है, पर सब प्यार से एक दूसरे से हाल चाल पूछ रहें हैं. मुद्दतें हो गई थी जिन दोस्तों से हुई मुलाकात हुए उनमें से कोई ५ जन आगे खड़ा था तो कोई बहुत पीछे, बस मुस्कुराकर हाथ हिला देते थे, खुद भी पसीने में थे और पास रखे कम या ज्यादा सब गाँधी भी पसीने में भीगे दिखलाई पड़ रहे थे, वो किस्से कहानियाँ, वो कॉलेज की यादें, वो स्कूल की शरारतें, फिर बतलाई, दोहराई जा रही थीं। किसी को वक़्त का इंतज़ार नहीं था, किसी को कोई फ़िक्र नहीं थी की कहीं जाना है, लेट हो रहे हैं, मेरे साथ कुछ और लोग भी थर्मस में चाय कॉफ़ी, पार्ले जी बिस्कुट ले आया करते थे, कोई किसी की शर्म नहीं कर रहा था, बस थैले ...