अब भी शिकायत है!
भीगते हुए गालों को आँखों से अब भी शिकायत है कि उनके लौट आने की उम्मीदों को छोड़ दें, आँखों को दिल से अब भी शिकायत है कि वो दर्द को छिपाना छोड़ दें, दिल को यादों से अब भी शिकायत है कि वो रातों को बेवजह आना छोड़ दें, यादों को रातों से अब भी शिकायत है कि वो चाँद को अपने साथ लाना छोड़ दे, रातों को सपनों से अब भी शिकायत है कि वो नींदों में आना छोड़ दें, सपनों को आँखों से अब भी शिकायत है की वो गालों को भिगाना छोड़ दे, आँखों को गालों से अब भी शिकायत है की वो यादों के सहारे मुस्कुराना छोड़ दें.